आज होगी लोन मोरेटोरियम मामले की सुनवाई, जानें इस केस के बारे में सबकुछ

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लोन मोरेटोरियम (Loan Moratorium) मामले में होने वाली सुनवाई को 18 नवंबर को भी एक दिन के लिए टाल दिया गया था. कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अनुपस्थित रहने के कारण सुनवाई को गुरुवार के लिए टाल दिया. आज यानी 19 नवंबर को इस मामले में सुनवाई होनी है. ब्याज को माफ किए जाने की मांग को लेकर दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) आज सुनवाई करेगा.

RBI ने ग्राहकों को लॉकडाउन में लोन मोरेटोरियम सुविधा का फायदा दिया था.आपको बता दें जस्टिस अशोक भूषण, आर सुभाष रेड्डी और एमआर शाह की बेंच छह महीने की लोन मोरेटोरियम वाली याचिका पर सुनवाई कर रही है. इस मामले में वित्त मंत्रालय और रिजर्व बैंक आफ इंडिया पहले ही सुप्रीम कोर्ट को हलफनामा दाखिल कर बता चुके हैं कि सरकार ने मोरेटोरियम अवधि का ब्याज पर ब्याज न वसूले जाने की योजना तैयार की है और 2 करोड़ तक कर्ज लेने वालों से मोरेटोरियम अवधि का ब्याज पर ब्याज नहीं लिया जाएगा. यह भी बताया था कि 2 करोड़ तक के कर्ज पर कमपाउंड ब्याज और साधारण ब्याज के बीच का वसूला गया अंतर कर्जदारों के खातों में वापस कर दिया जाएगा.

जानिए इस केस के बारे में

->> जस्टिस अशोक भूषण, आर सुभाष रेड्डी और एमआर शाह की तीन जजों की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं.

>> आरबीआई ने मार्च में तीन महीने के लिए लोन की किस्ते चुकाने से राहत दी थी, जिसे बाद में 31 अगस्त तक बढ़ा दिया गया था. इस कदम का मकसद कर्जदारों को COVID-19 महामारी के दौरान राहत प्रदान करना था.

>> सुप्रीम कोर्ट ने 14 अक्टूबर को ब्याज माफी की मांग करने वाली याचिकाओं के एक बैच पर अपनी सुनवाई को 2 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दिया, जिसे आगे 3 नवंबर को बढ़ा दिया गया.

>> सुप्रीम कोर्ट ने 2 नवंबर को ब्याज माफी की मांग करने वाली याचिकाओं के एक बैच पर अपनी सुनवाई स्थगित कर दी थी. शीर्ष अदालत ने सरकार को “उचित कार्रवाई के साथ” वापस आने का निर्देश दिया था.

>> मामले को सुनवाई के लिए 3 नवंबर तक के लिए टाल दिया गया था. उस समय पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सुनवाई के लिए उपलब्ध नहीं थे क्योंकि उन्हें दिल्ली में नए ग्रैंड विस्टा के निर्माण को चुनौती देने वाली दलीलों में उपस्थित होना था. सॉलिसिटर जनरल को इस मामले को 5 नवंबर तक के लिए स्थगित करने को कहा था.

>> 5 नवंबर को एक संक्षिप्त सुनवाई के बाद, मामला 18 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दिया गया.

>> कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के अनुपस्थित रहने के कारण सुनवाई को 18 नवंबर को भी टाल दिया था.

क्या है ब्याज पर ब्याज माफी की यह स्कीम?

कोविड-19 संकट के दौरान RBI ने 1 मार्च से लेकर 31 अगस्त के लिए लोन मोरेटोरियम लाभ देने का ऐलान किया था. 6 महीने की इस अवधि के दौरान ‘ब्याज पर ब्याज’ की रकम वापस करने के लिए केंद्र सरकार ने सहमति जताई थी. सरकार की तरफ इस स्कीम का लाभ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग, एजुकेशन, हाउसिंग, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, क्रेडिट कार्ड बकाया, ऑटो, पर्सनल व प्रोफेशनल और कंज्म्पशन लोन पर देने का ऐलान किया था.

क्या है शर्त?

इसके लिए शर्त ये है कि 29 फरवरी 2020 तक लोन अकाउंट स्टैंडर्ड होना चाहिए, यानी इस तारीख तक लोन अकाउंट एनपीए नहीं घोषित हुआ हो. 1 मार्च से लेकर 31 अगस्त के बीच के लिए बकाये लोन पर ही इस स्कीम का लाभ मिलेगा. वित्त मंत्रालय ने इस बारे में विस्तृत जानकारी दी है.

कोरोना संकट में सरकार ने दी मदद

आपको बता दें कि कोरोना के कारण लगे लॉकडाउन में कई लोगों की नौकरियां चली गईं. ऐसे में लोन की किस्तें चुकाना मुश्किल था. ऐसे में रिजर्व बैंक ने लोन मोरेटोरियम की सहूलियत दी थी. यानी लोन पर किस्तें टाल दी गई थी. किसी लोन पर मोरेटोरियम का लाभ लेते हुए किस्त नहीं चुकाई तो उस अवधि का ब्याज मूलधन में जुड़ जाएगा. यानी अब मूलधन+ब्याज पर ब्याज लगेगा. इसी ब्याज पर ब्याज का मसला सुप्रीम कोर्ट में है.

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